Ma Trikua Dham Logo Kota

माँ त्रिकुटा धाम, कोटा

!!जय माता दी!!

कोटा की पावन धरती पर माँ त्रिकुटा / वैष्णा देवी विराजमान

'Ma Trikuta Dham, Kota, Rajasthan' A unique entertainment and religious spot in Kota, Rajasthan

कोटा की पावन धरती पर माँ वैष्णों देवी जो कि त्रिकुट पर्वत तीन पहाड़ों की चोटियों के बीच में विराजमान होने के कारण माँ त्रिकुटा नाम से विश्व प्रसिद्ध हुई। प्राकृतिक पहाड़ों एवं गुफाओं में निर्मित ऐसा ही एक अदभुत अति भव्य माँ त्रिकुटा का दरबार “मों त्रिकुटा पाम” कोटा-बून्दी मेन रोड केशोराय पाटन तिराहे कोटा पर बदालुओं के दर्शन- हेतु दिनांक 19.11.2021 से भक्तो के दर्शन हेतु प्रारम्भ हो चुका है, जो कि गत 14 वर्षों से माँ त्रिकूटा के आदेश से अथक प्रयासों, लगन एवं अदा से निरन्तर निर्माणाधीन था।

माँ त्रिकुट की यात्रा लगभग 2500 मीटर लम्बी है एवं पूरी यात्रा करने में लगभग वेद घण्टे का समय लगता है। इस यात्रा के दौरान श्रदालुओं को माँ वैष्णों देवी की मूल यात्रा का ही अदभुत अनुभव होता है, जिसमें मुख्य द्वार में प्रवेश से दो शेरों के बीच में से निकलकर रुकी हुई ट्रेन कटरा स्टेशन का ही अनुभव देती हुई बोगी से यात्रा प्रारम्भ होती है

'Ma Trikuta Dham, Kota, Rajasthan'

रोहड़ा परिवार के पूजनीय दादाजी स्वर्गीय श्री नारायण दास जी रोहड़ा, जिनकी प्रेरणा से ही माँ त्रिकुटा धान का निर्माण सम्भव हो पाया माँ त्रिकूटा की यात्रा प्रारम्भ से ही माँ वैष्णों की मूल यात्रा के समान बनाने का प्रयास किया गया है, जिसके प्रारम्भ में (1) दर्शनी दरवाजे से माँ त्रिकुटा एक कन्या के रूप में आशीर्वाद देते हुये, (2) श्री गणेश जी संग माँ बाण गंगा (3) वृन्दावन जिसमें श्री कृष्ण संग राधा जी एवं गोपियों वालों के साथ रास लीला करते हुये (4) श्री सांई नाथ, (5) श्री राम दरबार जिसमें श्री राम जी संग माँ सीता श्री लक्ष्मण एवं हनुमान जी. (6) पर्वत उठाते हुये चोले वाले श्री हनुमान जी. (7) चरण पादुकाएँ, (8) हारे का सहारा ‘खाटू श्याम बाबा श्री कृष्ण-राधा रानी बाँके बिहारी, (9) बादलों के बीच विराजमान सूर्य नारायण भगवान एवं शनि भगवान भगवान (10) भक्तो के लिये माँ अन्नपूर्णा मैया का भण्डारा (11) जल से प्रकट होते ये झूलेलाल जी (12) माँ अर्द्ध कुमारी की पावन गुफा “गर्भ-जून” जहाँ पर माँ वैष्णों देवी एक नव शिशु की भाँति नो माह तक इस गुफा में रही, वहाँ पर माँ वैष्णो देवी, नो दुर्गा माँ के साथ विराजमान (13) हामी मत्या की बड़ाई, (14) सांझी छत जहाँ पर 200 भक्त एक साथ बैठकर अल्पाहार का आनन्द ले सकते है. (15) मोले बाबा की 32 फोट भी प्रतिमाँ जिसकी जटाओं से 25 फीट ऊँची जलधारा निरन्तर प्रवाहित रहती है. (16) तीन पर्वतों के बीच पवित्र गुफा में पिण्डी रूप में विराजमान माँ सरस्वती माँ लक्ष्मी माँ काली तथा स्वयं अष्ट भुजादारी माँ त्रिकुटा / वैष्णों देवी विराजमान है (17) ज्याता मैया जो निरन्तर अखण्ड ज्योत के रूप में प्रचलित भक्तो की मनोकामनाएं पूर्ण करते हुये, (10) शिव परिवार (19) भैरों बाबा के दर्शन के साथ यात्रा सम्पूर्ण होती है।

माँ त्रिकुटा घाम के सेवकों के द्वारा बताया गया कि माँ त्रिकुटा जो कि माँ सरस्वती. मॉ लक्ष्मी एवं माँ काली के रूप में तीन पिण्डियों के रूप में कटरा जिला जम्मू की पावन नदी में प्राकृतिक रूप से निर्मित पिण्डियों की माँ वैष्णों देवी के जम्मू में स्थित मूल मन्दिर में पूजा-अर्चना करवाकर कोटा की पावन धरती पर निर्मित माँ त्रिकुटा धाम में प्रवेश करने के पश्चात आरती करने के दौरान स्वयं माँ वैष्णों देवी ने दर्शन एवं आशीर्वाद देकर आदेश दिया कि दिनांक 15.11.2021 को प्राण प्रतिष्ठा करवाकर दिनांक 19.11. 2021 को श्रदालुओं के दर्शन हेतु माँ त्रिकुटा धाम के द्वार खोल दिये जाये।

माता के आदेशानुसार विधि विधान से पूजा-अर्चना प्रारम्भ करके माँ त्रिकुटा का आहवान प्रारम्भ कर दिया। तब से ही नित प्रति दिन माँ के चमत्कार सभी उपस्थित श्रदालुओं के समक्ष देकर माँ ने आशीर्वाद दिया। दिनांक 15.11.2021 को जब पूर्ण आहूति का समय आया तब स्वयं माँ त्रिकुटा तीन रूपों में दर्शन देकर पिण्डियों को अपने पवित्र हाथों से माँ त्रिकुटा धाम की पवित्र गुफा में स्वयं विराजमान करके अपने सेवक को परिवार सहित आजीवन मों के भवन की सेवा करने का आदेश देकर आशीर्वाद दिया।

कोटा से लगभग 1100 कि.मी. दूर माँ ज्वाला मैया जहाँ पर माँ सती की जीम गिरने से युगों-युगों से माँ कि अखण्ड ज्योत स्वतः ही प्रज्वलित रहती है, वहाँ से माँ के आदेश से माँ त्रिकुटा धाम की पवित्र गुफा में पावन ज्योत लाकर स्थापित की गई. जिसकी प्रचण्ड शक्ति माँ वैष्णों ने स्वयं माँ त्रिकुटा धाम में पिण्डीयों में विराजमान की।

माँ त्रिकुटा घाम में लगभग 52 प्राकृतिक झरने बनाये गये है तथा जूता संग्रह, लोकर्स, पक्षी घर, शेषनाग, श्रदालुओं की सुविधा के लिये लगभग 50 शौचालय सुविधाएँ. जगह-जगह पीने का शुद्ध पानी व बैठने की व्यवस्था सहित कई विश्राम स्थल बनाये गये है दो बेसमेन्ट में दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों के पार्किंग व्यवस्था की गई है। असहाय, दिव्यांग, बुजुर्ग आदि के लिये माँ त्रिकुटा घाम में विराजमान पिण्डीयों के दर्शनार्थ दो लिफ्टों की भी व्यवस्था की गई है तथा लिफ्ट की सुविधा सत्संग भवन एवं पार्किग में भी उपलब्ध है। माँ त्रिकुटा की यात्रा के बीच में ही 35 फीट ऊँचा एक सत्संग भवन का भी निर्माण किया गया है, जिसमें बादलों के बीच में लगभग 1500 भक्तगण एक साथ बैठकर माता के जागरण, सत्संग, कीर्तन का आध्यात्मिक लाभ एवं आनन्द प्राप्त करते हैं।